
किया बताऊँ वो सात दिन हॉस्पिटल में देखा सबको समझा ...security से लेकर ,सिस्टर तक सिस्टर से लेकर इन्चार्गे तक इन्चार्गे से लेकर डॉक्टर , डॉक्टर से लेकर हेड ऑफ़ डा डिपार्टमेंट .. तो फिर बैठे बैठे ..वो लाइन जो बार बार सुनने को मिली " डॉक्टर राउंड पर हैं "फिर किया हाथ में कलम आई मालिक की रहमत से लिख डाला जो भी मालिक ने लिखवाना चाहा ........डी ऍम सी हॉस्पिटल में बेड नंबर 6 .... रूम नंबर 2 , फ्लोर 2 ..

फिर नया दिन सब वही कोई हँसता हुआ कोई अपनी जुबान से शहद को गिराता हुआ और कोई कडवे शब्द बोल कर अपना प्यार ज़ताता हुआ . फिर भी वो अपने है . मन ही मन में समझाता हुआ .... Sister आई हँसती हुई बाग़ के फूलों को निहारती हुई सुगंद को महसूस करती हुई और उनकी सेवा में अपने आप को समप्रित करती हुई ! उनको समझती हुई , अपनी भावनाओं को दिल में रखकर ड्यूटी करती हुई बोली " डॉक्टर राउंड पैर है "
दोस्त कडवे शब्द
दोस्त जुबान कियों कडवी करते हो. माँ बाप के सपनो को पूरा करना है ..तो फिर कियों अहंकार से रिश्ता लगाना है . समझ लेना तुम दिल मत दुखाना ..तुमने अपने सपनो को बुलंदियों पर पहूंचना हैं ..तो अहंकार से रिश्ता मत लगाना ..कडवे शब्दों को भूल जाना ... तो फिर बताना "डॉक्टर राउंड पैर हैं "
माँ बाप के संस्कारों से इज्ज़त देना सिखा . जिनकी बदॊलत आज चलना सिखा . उनके नाम को चमकाते हुए इज्ज़त सबकी करते हुए . अपने हुनर से सबको सवारते हुए बचों के जीवन में नया रंग डालते हुए " हेड ऑफ़ डा डिपार्टमेंट ,डॉक्टर्स , इंचार्ज ,सिस्टर्स उनकी उदासी को ख़ुशी में बदलते हुए उनके माँ बाप की आँखों में नई चमक को भरते हुए , प्यार का जाम सब को पिलाते हुए " डॉक्टर राउंड पैर हैं " जिन्होंने इन फूलों को सजाना है ...हम सब ने इनको सर आँखों पर बिठाना है वो डॉक्टर राउंड पर हैं " डॉक्टर राउंड पर हैं ....
--Gaurav Saggi--
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